Saturday, 1 February 2025

बारहखड़ी

बारहखड़ी
व्यंजनों के साथ स्वरों  और अनुस्वार-विसर्ग के संयोग से बनने वाले अक्षरों के क्रम को बारहखड़ी कहते हैं। जब हम व्यंजनों को प्रत्येक स्वर के साथ मिलाकर किए जाने वाले उच्चारण को क्रम से सूचीबद्ध करते हैं तो एक सारणी बनती है, जिसे बारहखड़ी कहा जाता है।

बारहखड़ी (बाराखड़ी) में बारह तो 12 है, खड़ी क्या है?
खड़ी का संबंध खड़ी बोली या अक्षर की खड़ी की हुई आकृति से नहीं है। बारहखडी द्वादशाक्षरी [द्वादश (बारह) +अक्षर (आखर) ] से बना है। बारहाखरी > बारहखड़ी अर्थात् आखर (अक्षर) के 12 रूप! जैसे :-
क का कि की कु कू कृ के कै को कौ, कं क:।


कुछ लोग बारहखड़ी में ऋ को स्थान नहीं देते । उनका मानना है कि ऋ का उपयोग बहुत कम और थोड़े-से व्यंजनों के साथ होता है। और यह भी कि ऋ को भी स्वीकार कर लिया जाए तो बारहखड़ी तो तेरहखड़ी हो जाएगी!

यह ठीक नहीं है, क्योंकि पहला अक्षर तो मूल है। उस पर कोई मात्रा नहीं लगती। मात्रा संकेत जोड़े जाने पर उसके कुल 12 अक्षरी रूप (ऋ सहित) बनते हैं। ऋ को सम्मिलित न करें तो इग्याराखड़ी रह जाएगी।

(ं) तथा ( : ) स्वर नहीं हैं किंतु स्वरों के बिना बोले नहीं जा सकते तथा स्वरों के समान ही इनकी मात्राएँ होती हैं जो अक्षर का स्वतंत्र रूप बनाती हैं। इसलिए बाराखड़ी सारणी में इनको स्थान दिया जाता है।
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